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शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत पर 'शहादत दिवस' का आयोजन

पटना सिटी। सांप्रदायिक सद्भाव समन्वय समिति द्वारा शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की 94वीं शहादत वर्षगांठ के अवसर पर 'शहादत दिवस' ...


पटना सिटी।
सांप्रदायिक सद्भाव समन्वय समिति द्वारा शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की 94वीं शहादत वर्षगांठ के अवसर पर 'शहादत दिवस' का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्थानीय भगत सिंह चौक पर संपन्न हुआ, जहां शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

श्रद्धांजलि और नारों से गूंजा आयोजन स्थल

कार्यक्रम की शुरुआत शहीदों की तस्वीर पर पुष्पांजलि और माल्यार्पण से हुई। इस अवसर पर शहर के विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पुष्पांजलि के उपरांत ‘भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव अमर रहें’ एवं ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों से माहौल गूंज उठा।

शहीदों के विचार आज भी प्रासंगिक: वक्ता

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षाविद् एक़बाल अहमद ने कहा कि भगत सिंह दूरदर्शी व्यक्ति थे और उन्होंने निष्कर्ष निकाला था कि सामाजिक और आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक आज़ादी का कोई अर्थ नहीं होगा। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को बुलंदी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

डॉ. सी.पी. सिन्हा और हर्षा मिश्रा सहित अन्य वक्ताओं ने भी भगत सिंह के विचारों की प्रासंगिकता पर बल दिया।

अध्यक्षीय संबोधन में व्यवस्था-परिवर्तन की जरूरत पर जोर

कार्यकारी अध्यक्ष समी अहमद ने कहा कि देश को 1947 में आज़ादी तो मिली, लेकिन क्रांतिकारियों के सपने अब तक अधूरे हैं। उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी आबादी बुनियादी जरूरतों से वंचित है, इसलिए समाज और राष्ट्र को परिवर्तन की आवश्यकता है।


शहीदों की भव्य मूर्ति स्थापना का संकल्प

समारोह में मिथिलेश सिंह, प्रफुल्ल पांडेय, संजीव कुमार यादव, अरविंद प्रसाद, राजेश शुक्ला टिल्लू, ललन यादव, आशीष मिश्र, तन्मय यादव, धीरज कुमार और राजीव कुमार समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

समाजसेवी विजय कुमार सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया और समापन के दौरान यह संकल्प लिया गया कि भगत सिंह चौक पर स्थापित जीर्ण मूर्ति के स्थान पर एक नई भव्य प्रतिमा जल्द ही स्थापित की जाएगी।

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