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साहित्य, शिक्षा और संस्कृति के पर्याय थे डॉ. साथी : डॉ. ध्रुव कुमार

पटना सिटी। साहित्य, शिक्षा और संस्कृति के समन्वित प्रतीक माने जाने वाले डॉ. साथी के पुण्य स्मृति दिवस पर रविवार को महेंद्रू स्थित “व्योम” स...


पटना सिटी।
साहित्य, शिक्षा और संस्कृति के समन्वित प्रतीक माने जाने वाले डॉ. साथी के पुण्य स्मृति दिवस पर रविवार को महेंद्रू स्थित “व्योम” सभागार में एक स्मरण सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों और पत्रकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. ध्रुव कुमार ने कहा कि डॉ. साथी न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक युगपुरुष थे, बल्कि साहित्य और संस्कृति के सच्चे साधक भी थे। उन्होंने छात्रों में कौशल विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए। उनकी लिखी कई पुस्तकें पाठ्यक्रम में शामिल हुईं, जिससे सरकार को भी मार्गदर्शन मिला। युवाओं के बीच उन्हें ‘साथी’ के नाम से जाना जाता था।

साहित्य के क्षेत्र में डॉ. साथी का लघुकथा संग्रह “चरैवेति” विशेष रूप से चर्चित रहा। इस कृति ने न केवल लघुकथाकारों को नया दृष्टिकोण दिया, बल्कि शासन-प्रशासन को भी नई दिशा प्रदान की। वे सकारात्मक संस्कृति के पक्षधर थे और उनका कहना था कि “सभी में ईश्वर हैं, इसलिए सभी एक हैं—सबसे प्रेम करें।” 

कार्यक्रम के संयोजक अनिल रश्मि ने कहा कि डॉ. साथी संस्कृति के सच्चे प्रहरी और हृदय से संत थे। शिक्षाविद नेक आलम ने उन्हें सदियों में जन्म लेने वाले महापुरुषों में गिनते हुए कहा कि वे अपनी कीर्तियों के कारण सदैव जीवित रहेंगे।

इस अवसर पर लघुकथाकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया। इसमें डॉ. ध्रुव कुमार, चितरंजन भारती, आलोक चोपड़ा, ए. आर. हाशमी, वीरेंद्र भारद्वाज, प्रभात कुमार धवन, अनिल रश्मि और नेक आलम शामिल थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. साथी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण किया गया।

मीडिया प्रभारी जितेंद्र कुमार पाल ने बताया कि आयोजन में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

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