Page Nav

HIDE

add

Breaking News:

latest

add

 




 


 


भाईदूज पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक : चंद्रकला देवी

पटना सिटी (न्यूज़ सिटी)। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को हिन्दुओं का लोकप्रिय पर्व भाई दूज हर्षोल्लास मनाया गया। भाईदूज के पर्व क...


पटना सिटी (न्यूज़ सिटी)। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को हिन्दुओं का लोकप्रिय पर्व भाई दूज हर्षोल्लास मनाया गया। भाईदूज के पर्व को भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बहनें लम्बी उम्र की कामना के साथ अपने भाइयों को चंदन-रोड़ी लगाकर टीका करती हैं। इसके बदले में भाई अपनी बहन को प्रेम स्वरूप उपहार भेंट करते हैं।






https://youtu.be/dkWq0XE3hMs




चंद्रकला देवी ने बताई की भाई दूज के दिन भाई की हथेली पर बहनें चावल का घोल लगाती हैं। उसके ऊपर सिन्दूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी मुद्रा आदि हाथों पर रखकर धीरे धीरे पानी हाथों पर छोड़ते हुए कहती हैं जैसे ‘गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजा कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े’। इस दिन शाम के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखती हैं। इस समय ऊपर आसमान में चील उड़ता दिखाई दे तो बहुत ही शुभ माना जाता है। माना जाता है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं उसे यमराज ने कुबूल कर लिया है या चील जाकर यमराज को बहनों का संदेश सुनाएगा।





व्रती वंदना ने कही की भाई दूज को लेकर अलग-अलग इलाकों में भिन्न मान्यताएं हैं। कहीं भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना स्नान करते हैं तो कहीं भाई दूज के दिन बहनें बेरी पूजन भी करती हैं। इस दिन बहनें भाइयों को तेल मलकर गंगा यमुना में स्नान भी कराती हैं। इस दिन गोधन कूटने की प्रथा भी है। गोबर की मानव मूर्ति बनाकर छाती पर ईंट रखकर स्त्रियां उसे मूसलों से तोड़ती हैं। स्त्रियां घर-घर जाकर चना, गूम तथा भटकैया चराव कर जिव्हा को भटकैया के कांटे से दागती भी हैं। वही मौके पर रेणु मिश्रा, निधि, मनीषा और गुड़िया ने भी भाई दूज के त्योहार को हर्षोल्लास से मनाई।


ADD

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now