पटना (न्यूज सिटी)। केंद्रीय कैबिनेट ने कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट करवाने के लिए नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी बनाने की मंजूरी दी है। इस संबंध में सूच...
पटना (न्यूज सिटी)। केंद्रीय कैबिनेट ने कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट करवाने के लिए नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी बनाने की मंजूरी दी है। इस संबंध में सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को आयोजित हुई कैबिनेट के बैठक के बाद फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट होने से सरकारी नौकरी तलाश रहे युवाओं को फायदा होगा।
कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट होने से क्या फायदा होगा?
केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए अभी अलग-अलग एजेंसियां अलग-अलग परीक्षाएं करवाती हैं। कैंडिडेट्स को अलग-अलग वेकैंसी के बार-बार फीस भरनी होती है। टेस्ट सेंटर तक पहुंचने के लिए साल में कई बार लंबी दूरी का भी सफर करना पड़ता है। अब इससे छुटकारा मिल जाएगा। केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (SSC), रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB) और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग सर्विस पर्सनल (IBPS) की पहले स्टेज की परीक्षाएं अब नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी कॉमन करवाएगी।
कॉमन एंट्रेस टेस्ट की मेरिट लिस्ट 3 साल वैलिड रहेगी
सरकार ने बताया कि वर्तमान समय मे केंद्र सरकार की 20 से ज्यादा रिक्रूटमेंट एजेंसी हैं। इनमें से सिर्फ 3 एजेंसियों के एग्जाम कॉमन करवाए जा रहे हैं। मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि कॉमन एंट्रेस टेस्ट की मेरिट लिस्ट 3 साल के लिए वैलिड रहेगी। इस दौरान कैंडिडेट अपनी योग्यता और प्राथमिकता के हिसाब से अलग-अलग सेक्टर में नौकरियों के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह एक ऐतिहासिक रिफॉर्म है। इससे भर्तियां, सेलेक्शन और जॉब प्लेसमेंट आसान होगा।



