पटना (न्यूज सिटी)। जिले के पुनपुन प्रखंड परिसर स्थित वटवृक्ष की पूजा अर्चना महिलाओं द्वारा काफी धुमधाम से की गई। वटवृक्ष सावित्री व्रत कथा ...
पटना (न्यूज सिटी)। जिले के पुनपुन प्रखंड परिसर स्थित वटवृक्ष की पूजा अर्चना महिलाओं द्वारा काफी धुमधाम से की गई। वटवृक्ष सावित्री व्रत कथा जेयष्ठ त्रयोदशी से अमावस्या तक सुहागिन महिलाएं पति के दिर्घायु व सौभाग्य वृद्वि के लिए किया जाता है। वटवृक्ष सावित्री व्रत कथा से महिलाएं अपने पति की दिर्घायु होने की कामना करती हैं। वैसे कहा जाता है कि एक राजा किसी कारण वश से जंगल मे ऋषि रुप धारण कर रहते थे।उन्ही राजा का पुत्र सत्यवान था उस राजा के पुत्र सत्यवान से सावित्री का विवाह समपन्न होता है। भगवान नारद जी ने सत्य सावित्री को बताया कि आपका पति सत्यवान अलप आयु है।नारद जी सत्यवान के मृत्यु से पूर्व तिथि को व्यक्त कर दिया था। उक्त तिथि का समय आया तो सावित्री जिद करके सत्यवान के साथ जंगल से लकड़ी लाने चली गयी। जंगल मे लकड़ी काटने के वक्त सत्यवान को सर चकराने लगा, वो पेड़ से नीचे आकर सावित्री से कहता है कि मुझे सर मे पिड़ा हो रहा है। थोड़ा सर दबा दो जैसे ही सत्यवान का सर सावित्री के गोद मे जाता है।सत्यवान का प्राण वायु निकल जाता है। वहां भयंकर आकृति वाले यमराज प्रकट होते है। सावित्री ने पूछा आप कौन है तभी वो कहता है कि हम मृत्यु के देवता यमराज है। यहां सत्यवान के प्राण वायु को लेने आये है। सावित्री ने यमराज से सत्यवान के प्राण वायु ना ले जाने की जिद करने लगी परन्तु यमराज सावित्री के बात मानने को तैयर नही हुए तो सावित्री ने जिद करके यमराज के साथ यमलोक मे चल पड़ी। विशाल आकृति वाले यमराज ने सावित्री को काफी समझाया लेकिन सावित्री अपने जिद पर अड़ी रही। अंतत; यमराज सावित्री को बरदान स्वरुप सत्यवान के प्राण वायु को लौटाना पड़ा। यमराज के वरदान से सावित्री खुश हो जाती है। सावित्री का खोया सम्राज्य मिल जाता है। इस दौरान कथा वाचक पुरोहित कौशलेन्द्र नाथ मिश्रा ने व्रतियों को कथा सुनाकर वट वृक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला।
पटना से ललित नारायण सिंह की रिपोर्ट।।




