पटना सिटी। इस वक्त राजधानी पटना से बड़ी खबर आ रही है, जहाँ सरकार सरकारी अस्पताल के लिए मुहैया कराए गए जीवन रक्षक उपकरण को प्राइवेट अस्पताल क...
पटना सिटी। इस वक्त राजधानी पटना से बड़ी खबर आ रही है, जहाँ सरकार सरकारी अस्पताल के लिए मुहैया कराए गए जीवन रक्षक उपकरण को प्राइवेट अस्पताल को किराए पर दे रही है। सरकार के ऐसे निर्णय से गरीबों के शोषण होगा लाजमी है। मामला पटना सिटी के श्री गुरु गोविंद सिंह सदर अस्पताल की है, अस्पताल में रखे दो वेंटिलेटर मशीन को स्वास्थ्य विभाग की आदेश पर पटना के निजी अस्पताल में भेजा जा रहा है। जब वेंटिलेटर मशीन को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की जानकारी गुरु गोविंद सिंह सुधार समिति के अध्यक्ष बलराम चौधरी को हुई तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध जताया है।
सुधार समिति के अध्यक्ष बलराम चौधरी ने बताया कि वर्तमान समय मे सभी लोग कोरोना वायरस के संक्रमण को झेल रहे है। वही गुरु गोविंद सिंह अस्पताल को सीएस के माध्यम से राज्य स्वास्थ्य समिति , बिहार के द्वारा दो वेंटिलेटर मशीन दी गयी थी। इसके बाबजूद भी अस्पताल में वेंटिलेटर को इंस्टॉल नही किया गया। इसका खामियाजा गरीब वर्ग से इलाज कराने आ रहे मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
साथ ही बलराम चौधरी ने कहा कि एसजीजीएस अस्पताल में रखे वेंटिलेटर को राज्य सरकार व स्वास्थ्य विभाग की ओर से दो हजार रुपए प्रतिदिन की दर से किराये में बिग हॉस्पिटल भेजा जा रहा है। जिसका अस्पताल सुधार समिति पुरजोर विरोध करती है। उन्होंने कहा कि सरकार व विभाग द्वारा तुरंत इस आदेश को निरस्त कर वेंटिलेटर को एसजीजीएस अस्पताल में त्वरित कार्रवाई कर इंस्टॉल कराए। नही, तो सुधार समिति द्वारा विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
अस्पताल अधीक्षक डॉ• पशुपति प्रसाद सिंह से जब मीडिया कर्मियों ने सवाल पूछे तो उन्होंने बताया कि जनवरी - फरवरी महीने में राज्य स्वास्थ्य समिति व सीएस के नेतृत्व में अस्पताल में वेंटिलेटर मशीन उपलब्ध कराया गया था। उस समय से अब तक वेंटिलेटर इंस्टॉल नही किया जा सका है। जिस वजह से राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार व सीएस द्वारा दिये गए निर्देश पर वेंटिलेटर को बिग अपोलो हॉस्पिटल में भेजा जा रहा है।
गौरतलब है कि अब ऐसे में बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था सरकारी लापरवाही के कारण पंगु हो चुका है। इस रवैये के कारण श्री गुरु गोविंद सिंह अस्पताल में आने वाले मरीजों को आईसीयू व वेंटिलेटर तक सुविधा नही उपलब्ध करायी गयी है। यहां पर सीरियस कंडीशन में आने वाले मतिजो को अस्पताल प्रबंधन व डॉक्टरों द्वारा पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल या पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।




