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जिले में जल्द शुरू होने वाली है सीरोलॉजिकल सर्वे की प्रक्रिया 

- सर्वे के माध्यम से कोरोना संक्रमण के फैलाव व प्रभावित आबादी का पता लगाना होगा आसान  - सर्वे के दौरान 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की होगी...

- सर्वे के माध्यम से कोरोना संक्रमण के फैलाव व प्रभावित आबादी का पता लगाना होगा आसान 

- सर्वे के दौरान 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की होगी बल्ड सीरम की जांच 


अररिया।
जिले में सीरोलॉजिकल सर्वे की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग जरूरी तैयारियों में जुटा है। इसकी मदद से यह पता लगाने का प्रयास किया जायेगा कि क्षेत्र में कोरोना वायरस का संक्रमण कितना फैला है, कितनी बड़ी आबादी इस वायरस की जद में आयी है और कितनी आबादी में लोगों के अंदर इस वायरस से लड़ने के लिये इम्यूनिटी मतलब रोग प्रतिरोधक क्षमता या एंटीबॉटी विकसित हो चुका है। सर्वे के लिये 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का चयन किया जाना है। सर्वे के लिये किसी एक क्षेत्र में रहने वाले कई लोगों के खून के सीरम की जांच की जानी है। इसके लिये खून का नमूना संग्रह कर जांच के लिये आईसीएआर भेजा जायेगा। जांच नतीजों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जायेगा कि कितने लोगों के शरीर में कोरोना वायरस से लड़ने के लिये एंटीबॉडी विकसित हो चुका है| साथ ही ये पता लगाया जा सकेगा कि कौन सा शख्स इस वायरस से संक्रमित था और फिलहाल ठीक हो चुका हैं। 

सर्वे के लिये संक्रमण के लिहाज से हॉटस्पॉट इलाके का होगा चयन 

इस संबंध में जानकारी देते हुए डीपीएम अरिरया रेहान असरफ ने बतया कि सीरोलॉजिकल सर्वे के लिये जिले के वैसे पांच प्रखंडों का चयन किया गया, जो कोरोना संक्रमण से ज्यादा प्रभावित रहे हैं। इसमें अररिया, फारबिसगंज, नरपतगंज, जोकीहाट व रानीगंज प्रखंड को शामिल किया गया है। सर्वे के लिये सभी प्रखंड के दो साइट निर्धारित किये जायेंगे, जो संक्रमण के लिहाज से हॉटस्पॉट जोन रहे हैं। इसमें किसी गांव के सबसे अधिक प्रभावित दो वार्डों को सीरोलॉजिकल सर्वे के लिये चयन किया जाना है। 

सर्वे से कम्युनिटी ट्रांसमिशन व हर्ड इम्युनिटी का पता लगाना होगा आसान 

डीआईओ डॉ मोईज ने बताया कि संक्रामक बीमारियों में संक्रमण की मॉनिटरिंग के लिये सीरो सर्वे कराये जाते हैं। इन्हें एंटीटीबॉडी सर्वे भी कहा जाता है। इसमें किसी भी संक्रामक बीमारी के खिलाफ शरीर में पैदा हुए एंटीबॉडी का पता लगाना आसान होता है। कोरोना वायरस से ठीक होने वाले मरीजों में एंटीबॉडी बन जाती हैजो वायरस के खिलाफ शरीर को प्रतिरोधात्मक क्षमता देता है। किसी बीमारी को लेकर किये गये सीरोलॉजिकल सर्वे से यह पता लगाया जा सकता है कि उक्त बीमारी, जनसंख्या में कितना आम हो चुका है। संक्रमण के फैलाव के साथ-साथ इससे यह पता चलता है कि बिना किसी लक्षण के ये बीमारी कितने लोगों में फैल रहा है और ऐसे संक्रमण के कितने मामले हैं जो बिना सामने आये ठीक हो चुके है। इससे कम्युनिटी ट्रांसमिशन व हर्ड इम्युनिटी का पता लगाना आसान होता है। टेस्ट निगेटिव आने का मतलब है कि या तो व्यक्ति वायरस की चपेट में कभी आया ही नहीं. या फिलहाल इतना वक्त नहीं हुआ है कि उनके शरीर में एंटीबॉडी विकसित हो सके। मालूम हो कि कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के कम से एक से तीन हफ्ते का वक्त शरीर में एंटीबॉडी के बनने में लग सकता है।

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