पटना सिटी (न्यूज सिटी)। "सभी का ख़ून शामिल है यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है ।"........अपने रिश्तों की अभी ...
पटना सिटी (न्यूज सिटी)। "सभी का ख़ून शामिल है यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है ।"........अपने रिश्तों की अभी साँस नहीं उखड़ी है......मैं अभी तेरी मुहब्बत पे यकीं रखता हूँ। "
उर्दू अदब के आवाम की ज़ुबान साहित्य सम्राट, शायरी के आतंक, सदी के महांतम शायर ज़नाब राहत इंदौरी साहेब जब मंच पर आते थे तो उनका जलवानुमा शायरी का आतंक इस क़दर लोगों के सर चढ़कर छा जाता था। उसके बाद ….. दूसरे शायर की जरूरत ही नहीं …….। ये बातें आज महेन्द्रू स्थित " व्योम " सभागार से (वर्चुअल ), स्वराँजलि द्वारा आयोजित शोकसभा में स्वराँजलि के उर्दू साहित्य प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शिक्षाविद सरफ़राज़ आलम नें कही।
सभा की अध्य़क्षता करते हुए शिक्षाविद व लेखक डॉ. ध्रुव कुमार नें उन्हें सृष्टि का अनमोलतम सितारा बताते हुए कहा उनकी शायरी में हिंदुस्तां का दिल धड़कता था। राहत साहेब की शायरी : " लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है … पढ़कर उन्हें खीराजे-अकीदद पेश किया।
उर्दू अदब के पैरवीकार व गायक अनिल रश्मि नें संस्मरण सुनाते हुए कहा … जब ज़नाब इन्दौरी साहेब पटना सिटी के आलमगंज में हुए कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे। तब एक हरदिल अज़ीज़ पत्रकार के माध्यम से कार्यक्रम शामिल होने का मौक़ा मिला। तीसरी पंक्ति में बैठ उनकी शायरी पर बार-बार दाद दिया तो उनकी नूरानी आँखें मेरी आंखों की पुतली से टकरा गईं, वो मुस्कुराए औऱ उन्होनें पढ़ा .." जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों, मोहब्बत करने वाला जा रहा है ..।" मौत की ख़बर सुन ये दृश्य चरैवेति युत है औऱ मैं निःशब्द …मौन हूँ!!!!
अंत में उन्हें "अल्लाह " ज़न्नत अता फरमाएं, दुआ की गई औऱ सर्वधर्म प्रार्थना भी की गई। महासचिव डा. ध्रुव कुमार नें इस अज़ीम शायर के नाम से राजधानी के हृदय-पटल पर विहंगम पुस्तकालय खोलने की माँग राज्य सरकार से की है। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी कहा। मौक़े पर सलमान गनी, डा. एजाज़ रसूल, जीशान रसूल, प्रभात कुमार धवन, प्रेम किरण, डा. सूर्य प्रताप, राजा पुट्टु, नितिन कुमार वर्मा नें उनकी शायरी पढ़ गहरी संवेदना व्यक्त की है।



