पटना सिटी। स्वरांजलि सभागार में आयोजित कार्यक्रम में संगीत मर्मज्ञ एवं लेखक डॉ. ध्रुव कुमार ने कहा कि मोहम्मद रफ़ी अपनी कशिशभरी आवाज़ के कार...
पटना सिटी। स्वरांजलि सभागार में आयोजित कार्यक्रम में संगीत मर्मज्ञ एवं लेखक डॉ. ध्रुव कुमार ने कहा कि मोहम्मद रफ़ी अपनी कशिशभरी आवाज़ के कारण आज भी सबके दिलों में जीवित हैं। उन्होंने कहा कि रफ़ी साहब के गाए गीत सीधे रूह को छू जाते हैं। उनका हर गाना एक मिसाल है, चाहे वह भक्ति गीत हो, दर्दभरा नगमा हो, या जोश से भरपूर गानें। डॉ. कुमार ने कहा, “आज भी रफ़ी साहब के बिना किसी भी संगीत कार्यक्रम को अधूरा माना जाता है। उनके गाए गीत ‘मन तड़पत हरि दर्शन को’ जैसे कई उदाहरण इसकी पुष्टि करते हैं।”
कार्यक्रम का शुभारंभ संयोजक अनिल रश्मि ने गीत ‘बार बार दिन ये आए’ गाकर किया। इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ।
आलोक चौबे ने ‘दिल का सुना साज’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अभिषेक पैट्रिक ने ‘दर्दे दिल दर्दे जिगर’ गाकर माहौल को संजीदा बना दिया। मुन्ना कुमार ने ‘तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा’ गाकर दर्शकों को एकता का संदेश दिया।
पप्पू गुप्ता ने ‘बने चाहे दुश्मन ज़माना’ गाकर जोश भरा, जबकि आलोक चोपड़ा ने ‘मेरे पैरों में घुंघरू बंधा दे’ गाकर समां बांधा। अंत में संजीव प्रियदर्शी ने ‘आदमी मुसाफिर है’ प्रस्तुत कर कार्यक्रम का समापन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में रफ़ी साहब के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। मौके पर रामजी मेहता, नेक आलम, नितिन कुमार वर्मा, राजा पुट्टू, विजयेंद्र चंद्रवंशी, सुनीता रानी और प्रीति कुमारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के सफल आयोजन की जानकारी मीडिया प्रभारी जितेंद्र कुमार पाल ने दी।





