पटना सिटी। बिहार की स्वर कोकिला, शारदा सिन्हा के निधन पर पटना सिटी के मानस पथ स्थित स्वरांजलि सभागार में एक (वर्चुअल) शोक सभा का आयोजन किया...
पटना सिटी। बिहार की स्वर कोकिला, शारदा सिन्हा के निधन पर पटना सिटी के मानस पथ स्थित स्वरांजलि सभागार में एक (वर्चुअल) शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने शारदा जी को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राज कुमार नाहर ने कहा, “शारदा सिन्हा ने छठ के गीतों के माध्यम से खुद को छठ मईया में समर्पित कर दिया था। उनकी कोयल जैसी मधुर आवाज़ में छठ मईया की गूँज समाहित हो चुकी है, जो अनंतकाल तक लोगों के दिलों में गूँजती रहेगी।” उन्होंने कहा कि शारदा जी के साथ उनका व्यक्तिगत संबंध था, और उनके जाने से वे अत्यंत मर्माहत हैं।
वहीं शिक्षाविद और कलाकार डॉ. ध्रुव कुमार ने कहा, “शारदा जी ने पारंपरिक संस्कृति को अपनी आवाज़ दी और इसे अमर बना दिया। उनके गीतों ने मानवीय जीवन के विभिन्न सांस्कृतिक पहलुओं को छुआ, और उनकी मधुर ध्वनि जब-जब गूंजेगी, उनके योगदान को हर दिल में जीवित रखेगी।” उन्होंने कहा कि शारदा जी ने विवाह संस्कार और बेटी के महत्व को अपने गीतों में विशेष स्थान दिया, और यही कारण है कि उनकी आवाज़ समाज के हर पहलू में गहरी पैठ रखती है।
विख्यात संगीतकार उस्ताद रौशन अली ने उनके संगीत के प्रति समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा, “संगीत ही उनका जीवन था। उनके गायन में संगीत साधना की झलक स्पष्ट दिखाई देती थी, और वे उच्च कोटि की गायिका थीं। उनकी जन्नत नसीब हो।” शारदा जी के योगदान से संगीत जगत में जो शून्यता उत्पन्न हुई है, उसे भर पाना असंभव है।
शोक सभा में संवेदना व्यक्त करने वालों में कलाकार संघ के अध्यक्ष आलोक चोपड़ा, संगीतकार पं. ओम प्रकाश चौबे, संगीतकार पप्पू गुप्ता, गायक आलोक चौबे, गायक समर्थ नाहर, जिम्मी गुप्ता, संजय प्रियदर्शी, राजा पुट्टू, जितेंद्र मोहन, नेक आलम, नितिन कुमार वर्मा, रंगकर्मी गुंजन "गूंजेश", सुनीता रानी, रीना मेहता और सीमा तृप्ति शामिल थे। शोक सभा के संयोजक अनिल रश्मि ने सभी कलाकारों के समर्थन से राज्य सरकार से पटना के हृदय स्थल पर संगीत विदुषी शारदा सिन्हा की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा, “शारदा जी के प्रति यह सच्ची श्रद्धांजलि होगी और उनकी स्मृति को अमर बनाए रखेगी।”
शारदा सिन्हा की यह अद्भुत संगीत साधना और बिहार की सांस्कृतिक धरोहर में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।








