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कोरोना काल में प्रसूता को सुरक्षित प्रसव की सेवाएं उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकताओं में शामिल

पूर्णिया। वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग...


पूर्णिया।
वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग तरह-तरह की योजनाएं लागू कर रहा है। जिससे राज्य के मरीज़ों को किसी तरह से कोई परेशानी नहीं हो। कोरोना संक्रमण काल में निजी चिकित्सक या निजी नर्सिंग होम संचालकों द्वारा इलाज़ नहीं करना या नर्सिंग होम को बंद कर देना आम बात है। ज़िले के सरकारी अस्पतालों में प्रसूता एवं नवजात शिशुओं को सुरक्षित प्रसव की सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर स्वास्थ्य विभाग हर समय प्रतिबद्ध रहता है। जिलाधिकारी राहुल कुमार द्वारा ज़िले के सभी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। जिसके तहत ज़िला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के उद्देश्य से लक्ष्य कार्यक्रम के तहत प्रमाणीकरण के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैसा का क्षेत्रीय कोचिंग टीम के द्वारा निरीक्षण किया गया। दो सदस्यीय टीम में पूर्णिया प्रमंडल के क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमुल होदा एवं यूनीसेफ के क्षेत्रीय सलाहकार शिव शेखर आनंद शामिल थे। जबकिं मौके पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैसा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रफ़ी जुबैर, अस्पताल प्रबंधक आलोक वर्मा, बीसीएम राजेश कुमार, केयर इंडिया के बीएम रोहित सिंह, प्रसव गृह में पदस्थापित जीएनएम स्वर्ण श्वेता भारती, सायिका परवीन, अभिलाषा कुमारी, दीपशिखा कुमारी, वहीं एएनएम सुनीता कुमारी व सुनीता दास, डाटा ऑपरेटर में कुमार अविनाश व गिरीश मिश्रा सहित कई अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे। 

प्रसव से जुड़ी हुई सेवाओं को पहले से बेहतर करने का लगातार किया जा रहा हैं प्रयास : आरपीएम 

लक्ष्य प्रमाणीकरण के लिए बैसा सीएचसी का निरीक्षण करने गई टीम को लीड करने वाले क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमूल होदा ने बताया अस्पताल में संस्थागत व सुरक्षित प्रसव को लेकर कई तरह के आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल में भी शहरों जैसी सुविधाएं मिलना बहुत अच्छी बात है। प्रसव से जुड़ी हुई सेवाओं को पहले से और बेहतर करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। क्योंकि अब नई नई तकनीक वाली मशीनें उपलब्ध हो रही हैं। जिससे इलाज के दौरान दूसरे अस्पताल या रेफर करने की प्रक्रिया से निज़ात मिलने वाली है। इसके लिए सिविल सर्जन सहित ज़िला स्तरीय स्वास्थ्य विभाग की टीम के द्वारा लगातार दौरा कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिया जा रहा है। टीम के द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश के अलोक में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मी संस्थागत व सुरक्षित प्रसव को लेकर पूरी तरह से सजग हैं।

लक्ष्य प्रमाणीकरण के लिए तीन चरण में किया जाता है निरीक्षण : शिव शेखर आनंद 

क्षेत्रीय कोचिंग टीम के सदस्य सह यूनीसेफ के प्रमंडलीय सलाहकार शिव शेखर आनंद ने बताया लक्ष्य योजना के तहत भारत सरकार द्वारा प्रसव कक्ष व ऑपरेशन थियेटर के लिए प्रमाणीकरण की व्यवस्था की गयी है। जो मानक स्तर पर प्रसव से संबंधित सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद ही दी जाती हैं। हालांकि इसकी व्यवस्था तीन स्तरों पर की गई है। पहला अस्पताल स्तर पर क्वालिटी सर्किल टीम, दूसरा जिला स्तर पर जिला गुणवत्ता यकीन समिति और तीसरा प्रमंडलीय स्तर पर क्षेत्रीय कोचिंग टीम के द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किया जाता है। उसके बाद ही निर्धारित मानकों के आधार पर कम से कम 70 प्रतिशत उपलब्धि होने के बाद इसे राज्य स्तर पर मान्यता लेने के लिए भेजा जाता है। 

ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल होने के बावजूद बेहतर तरीके से दी जाती हैं स्वास्थ्य सेवाएं : एमओआईसी 

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैसा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रफ़ी जुबैर ने बताया कि लक्ष्य कार्यक्रम का मूल उद्देश्य यह है कि प्रसूति विभाग से संबंधित सभी तरह की सुविधाओं को सुदृढ़ बनाना और इससे जुड़ी हुई सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना होता है। जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिहाज से लक्ष्य प्रमाणीकरण बहुत ज्यादा कारगर माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल होने के बावजूद बेहतर तरीके से हर तरह के मरीज़ों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा लक्ष्य कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है। इसके तहत प्रसव कक्ष, मैटरनिटी सेंटर, ऑपरेशन थियेटर व प्रसूता के लिए बनाये गए एसएनसीयू की गुणवत्ता में सुधार लाना है। 

इन मानकों पर तय किया जाता हैं पुरस्कार : 

• अस्पताल की आधारभूत संरचना-साफ-सफाई एवं स्वच्छता। 

• जैविक कचरा निस्तारण -संक्रमण रोकथाम।

• अस्पताल की अन्य सहायक प्रणाली -स्वच्छता एवं साफ़-सफाई को बढ़ावा देना।

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