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मातृ-मृत्यु दर समीक्षा की निगरानी एवं प्रतिक्रिया को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

पूर्णिया। राज्य में मातृ मृत्यु के अनुपात में पहले की अपेक्षा बहुत ज़्यादा गिरावट आई है। वर्ष 2004-06 के दौरान बिहार का मातृ मृत्यु का अनुपा...


पूर्णिया।
राज्य में मातृ मृत्यु के अनुपात में पहले की अपेक्षा बहुत ज़्यादा गिरावट आई है। वर्ष 2004-06 के दौरान बिहार का मातृ मृत्यु का अनुपात 312 से कम होकर 2018-19 में 165 हो गया है। यह गिरावट लगभग 47 प्रतिशत हैं। प्रत्येक वर्ष एक लाख जीवित बच्चों के अनुपात में 165 माताओं की मृत्यु हुई है। प्रत्येक गर्भवती माता का सुरक्षित प्रसव करवा कर एवं प्रसव के बाद देखभाल सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2030 तक लक्ष्य रखा गया है। सदर अस्पताल स्थित ज़िला प्रतिरक्षण कार्यालय के सभागार में बुधवार को मातृ-मृत्यु समीक्षा की निगरानी एवं प्रतिक्रिया को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन स्वास्थ्य विभाग व केयर इंडिया के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस कार्यशाला में गर्भावस्था से लेकर प्रसव के 42 दिनों के अंदर महिलाओं की मृत्यु से संबंधित विभिन्न तरह के आंकड़ों के साथ विस्तृत रूप से प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। मृत्यु के प्रमुख कारण व निदान के उपायों पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ उमेश शर्मा, एसीएमओ डॉ एसके वर्मा, प्रभारी डीआईओ डॉ सुधांशु कुमार, डीसीएम संजय कुमार दिनकर, एसआरयू पटना की ओर से मातृत्व स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ मीनल शुक्ला, केयर इंडिया के डिटीएल आलोक पटनायक, जिला तकनीकी अधिकारी डॉ देवब्रत महापात्रा, यूनिसेफ़ के प्रमंडलीय सलाहकार शिव शेखर आनंद, सीफार के डीपीसी धर्मेंद्र कुमार रस्तोगी सहित ज़िले के सभी एमओआईसी व बीसीएम मौजूद थे। 

गर्भावस्था के समय कम से कम चार बार एएनसी कराना होगा बेहद आवश्यक : 

सीएस सिविल सर्जन डॉ उमेश शर्मा ने बताया गर्भवती महिलाओं के मातृ-मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग बहुत ज़्यादा गंभीर है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग व केयर इंडिया के द्वारा संयुक्त रूप से सार्थक पहल का परिणाम है कि मातृ-मृत्यु दर में लगातार कमी आ रही है। वर्ष 2019-20 के दौरान 110 व 2020-21 ( फ़रवरी ) तक 91 गर्भवती महिलाओं की मृत्यु हुई है। हालांकि यह आकंड़ा पहले की अपेक्षा बहुत ही कम हुआ है। क्योंकि गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच यानी एएनसी का कार्य ज़िले में लगातार किया जा रहा है। गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार एएनसी जरूरी है। 

प्रसव के दौरान स्वास्थ्य केंद्रों पर बुनियादी स्तर पर सुविधा उपलब्ध : 

एसीएमओ प्रसव पूर्व गर्भवती महिलाओं का ब्लडप्रेशर, नब्ज, तापमान, हीमोग्लोबिन, मलमूत्र में ग्लूकोज की मात्रा और गर्भस्थ शिशु के हृदय गति की जांच की जाती है ताकि नवजात शिशु पूरी तरह से स्वस्थ व सुरक्षित रहे। प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को दवा, कॉटन या पैड्स की व्यवस्था की जाती है। प्रसव के समय और उससे पूर्व स्वास्थ्य केंद्रों की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए बुनियादी स्तर पर हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। 

व्यक्तिगत तौर पर देखभाल से जुड़ी सेवाओं की गुणवत्ता भी बढ़ानी होगी : 

डॉ मीनल एसआरयू पटना से आई मातृत्व स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ मीनल शुक्ला ने बताया मातृ मृत्यु दर कम करने और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रसूति सेवाओं में लगातार हो रहे सुधार के साथ ही केंद्रित देखभाल की भूमिका महत्वपूर्ण हुई है। मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में गुणवत्ता संबंधी बाधाओं को सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से दूर नहीं किया जा सकता हैं बल्कि इसके लिए व्यक्तिगत तौर पर देखभाल से जुड़ी सेवाओं की गुणवत्ता भी बढ़ानी होगी।

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