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8 अक्टूबर का भारत बंद ऐतिहासिक होगा, सरकार कदम पीछे करने को बाध्य होगी : माले

पटना (न्यूज सिटी)। तीनों काले कृषि कानूनों की वापसी, न्यनूतम समर्थन मूल्य पर सभी फसलों की खरीद की गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की अनुशंसाओं को ला...


पटना (न्यूज सिटी)।
तीनों काले कृषि कानूनों की वापसी, न्यनूतम समर्थन मूल्य पर सभी फसलों की खरीद की गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की अनुशंसाओं को लागू करने, प्रस्तावित बिजली बिल 2020 वापस लेने, किसान नेताओं सहित सभी लोकतंत्र-मानवाधिकार की लड़ाई लड़ रहे कार्यकर्ताओं पर लादे गए फर्जी मुकदमे की वापसी आदि मांगों पर 8 दिसंबर का भारत बंद ऐतिहासिक होगा। यह बंद केंद्र सरकार को तीनों काले कानून वापस करने पर विवश करेगा। उक्त बातें आज एक बयान जारी करके माले राज्य सचिव कुणाल ने कही। पटना में 11 बजे बुद्धा स्मृति पार्क से मुख्य मार्च निकालेगा। माले विधायक सुदामा प्रसाद भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि बंद से आवश्यक सेवाओं को मुक्त रखा गया है। पार्टी कमिटियों को निर्देश दिया गया है कि सुबह से ही सभी प्रमुख राष्ट्रीय पथों, उच्च पथों, रेल सेवाओं का परिचालन ठप करके बंद को ऐतिहासिक बनाने का काम करें। उन्होंने बिहार की जनता से भी अपील कि है कि खेत व किसानी बचाने के इस राष्ट्रव्यापी अभियान को अपना समर्थन दें और खेती को काॅरपोरेट के हवाले नीलाम करने की भाजपाई साजिश का मुकम्मल जवाब दें। कहा कि पटना के कल के मार्च में तरारी से माले विधायक व अखिल भारतीय किसान महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सुदामा प्रसाद भी भाग लेंगे। सुदामा प्रसाद दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में वहां गए थे और तीन दिनों तक दिल्ली के मोर्चे पर डटे हुए थे। आगे कहा कि भाजपा के नेताओं का अनर्गल प्रलाप आरंभ हो गया है। वे खेती व किसानी बचाने के इस महाअभियान को अपने स्वभाव के मुताबिक दुष्प्रचारित करने में उतर गए हैं। कह रहे हैं कि इसमें देशद्रोही ताकतें शामिल हैं। लेकिन जो पार्टी किसानों की न हो सकी, उससे बड़ा देशद्रोही कौन हो सकता है? बिहार में तो भाजपा-जदयू ने 2006 में ही मंडियों को खत्म करके बिहार की खेती को बर्बादी के रास्ते धकेल दिया है। बिहार में कहीं भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद नहीं होती है। बिहार के किसानों की हालत सबसे खराब है। वहीं अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के महासचिव धीरेन्द्र झा ने भी बयान जारी करके कहा है कि उनका संगठन भी कल के बंद में सक्रिय तौर पर शामिल होगा। किसानों के मुद्दों के साथ-साथ खेत व ग्रामीण मजदूरों के वास-आवास और रोजी-रोटी जैसे सवालों को उठाते हुए कल के बंद में भागीदारी होगी। भाकपा-माले से जुड़े संगठनों ऐक्टू, ऐपवा, आइसा, इनौस व अन्य संगठन भी किसान संगठनों के आह्वान पर आयोजित भारत बंद में प्रमुखता से शामिल होंगे। आरएसएस प्रमुख बिहार में दंगा फैलाने की ट्रेनिंग देने आए हैं, लाॅक डाउन में आरएसएस के लोग कहाँ थे। माले राज्य सचिव कुणाल ने आगे कहा कि आजकल मोहन भागवत बिहार के दौरे पर हैं। बिहार की जनता जानना चाहती है कि जब प्रवासी मजदूर और आम लोग कोरोना जनित लाॅकडाउन की मार झेल रहे थे, तब संघ के लोग कहां थे? कहने की जरूरत नहीं कि उस समय आरएसएस के लोग जो अपने को स्वयंसेवक कहते हैं, घरों में दुबके हुए थे। भाजपा व संघ गिरोह ने प्रवासी मजदूरों व जनता को मरने के लिए छोड़ दिया। उनको कई प्रकार की यातनाएं दी गईं। बिहार के लोग उस दर्द को कभी नहीं भूल सकते। संघ गिरोह का काम केवल दंगा-फसाद की राजनीति को बढ़ावा देकर समाज में सांप्रदायिक सौहार्द की भावना को बिगाड़ना है। उन्होंने बिहार की जनता से अपील की है कि वे संघ गिरोह के किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार से सावधान रहें तथा बिहार को यूपी बनाने की उनकी साजिश को कामयाब नहीं होने दे।

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