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सबसे ज्यादा जरूरत पूरे देश को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की है : पप्पू वर्मा

(न्यूज़ सिटी) पटना । पटना विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य पप्पू वर्मा ने कहां की भारत सरकार द्वारा देशवासियों के हितों में दिए गए 2000000,ह...


(न्यूज़ सिटी) पटना । पटना विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य पप्पू वर्मा ने कहां की भारत सरकार द्वारा देशवासियों के हितों में दिए गए 2000000,हजार लाख करोड़ के बड़े बजट की राशि को स्वास्थ्य,शिक्षा और रोजगार में इस राशि का अधिकांश हिस्सा खर्च होना चाहिए। पप्पू वर्मा ने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि अभी सबसे ज्यादा जरूरत पूरे देश को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की है। वैश्विक महामारी के समय जब पूरी दुनिया अपने-अपने देशों की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ व मजबूत बनाने में लगे हुए हैं,वहीं भारत सरकार को भी चाहिए स्वास्थ,शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भारत को मजबूत बनाया जाए।






https://www.youtube.com/watch?v=hy2Y_D3T-vc




भारत के पास अभी समय है की इस बड़े बजट को इन सभी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर इन्वेस्ट किया जाए देश में पंचायत स्तर पर आधुनिक सभी उपकरणों से लैस सरकारी अस्पताल हो, प्रत्येक जिला में सुपर स्पेशलिस्ट प्रत्येक पंचायत में धुनिक रूप से व्यवस्थित प्लस टू स्कूल , रोजगार हेतु आधुनिक देसी गायों का गौशाला, मछली पालन ,कृषि एवं स्किल डेवलपमेंट से जुड़ा हुआ पंचायत स्तर पर ही रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाए। श्री वर्मा ने कहा कि आज देश को सबसे ज्यादा जरूरत इन सभी मूलभूत सुविधाओं की है। देश के कई पंचायतों में अस्पताल तो हैं लेकिन व्यवस्थित नहीं है, सरकारी विद्यालय तो हैं लेकिन इनमें व्यवस्थाओं का काफी अभाव है आज भी स्कूल का सरकारी भवन जर्जर अवस्था में है भवन है तो बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं साफ-सुथरे शौचालय नहीं इन सभी अव्यवस्थाओं के कारण आज भी ग्रामीण क्षेत्र के लोग इन सभी सुविधाओं के लिए शहर की ओर जाने पर विवस है।






https://www.youtube.com/watch?v=TJbq0qd8GiM




आज इन्ही सभी अव्यवस्थाओं के कारण गांव से बड़े पैमाने पर पलायन हुआ आज जो सेवा का क्षेत्र शिक्षा और स्वास्थ्य था वह व्यवसाय का रूप ले लिया आज पढ़ने के लिए प्राइवेट स्कूल प्राइवेट अस्पताल, गायों को जहरीली इंजेक्शन लगा कर दूध का रोजगार, खेती से आमदनी कम व रोजगार के संसाधनों की कमी के कारण रोजगार के लिए शहर की ओर पलायन का प्रचलन बड़े पैमाने पर शुरू हुआ।









जिसका परिणाम जब देश इस महामारी के समय मुसीबत में आया तब लोगों को ध्यान आया कि इन सभी चीजों का कितना अभाव है। अभी समय है चुनौतियों को अवसर के रूप में बदलते हुए हम सभी मिलकर देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़े आज कृत संकल्पित होकर केंद्र व राज्यों के सरकारों को अभियान के रूप में लेकर इन सभी समस्याओं का समाधान करते हुए इन सभी संसाधनों से देशवासियों को व्यवस्थित करें निश्चित ही ,21वी सदी भारत की है और भारत विश्व का नेतृत्व करने के लिए उठ खड़ा हो


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