पटना (न्यूज सिटी)। संघर्ष को समाज में अस्वभाविक भी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि जब सीमित लक्ष्यों को अनेक व्यक्ति प्राप्त करना चाहे तो संघर्ष स...
पटना (न्यूज सिटी)। संघर्ष को समाज में अस्वभाविक भी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि जब सीमित लक्ष्यों को अनेक व्यक्ति प्राप्त करना चाहे तो संघर्ष स्वभाविक है। ऐसे ही संघर्ष के बीच बिहार के बक्सर के आशापररी एक छोटे से गांव के उभरते हुए कलाकार राज तिवारी संग्राम ने अपने बूते पहचान बनाने की कोशिश की है। 2011 से भोजपुरी शॉर्ट फिल्म से अपने कैरियर की शुरुआत किया। जिसके बाद से उन्होंने कभी मुड़ कर पीछे नहीं देखा। इसकी बदौलत उन्होंने नित्य नए आयाम गढे। हालांकि इस बीच उनका संघर्ष जारी रहा। एक के बाद एक छोटे-बड़े शॉर्ट फिल्मों में उन्होंने काम कर मुकाम हासिल किया है। अब अपनी नई पटकथा लिखने जा रहे हैं। वन वे फिल्म से इनकी उम्मीद व संघर्ष जुड़ी हुई है। उन्होंने ने बताया कि अपनी फिल्म को रॉयल बिहारी यूट्यूब चैनल पर लेकर आने वाले हैं। फिल्म के निर्देशक राज तिवारी संग्राम ने बताया कि एक ही रास्ता अपनाए है, वो है वन वे। जो कि सीधा वह सरल है तभी जाकर आप अपनी पहचान बना पाएंगे।




